आधी रात को गोकुल कैसे पहुँचे बाल कृष्ण? वासुदेव जी की अद्भुत कथा
पढ़िए वासुदेव जी द्वारा नवजात श्रीकृष्ण को मथुरा से गोकुल ले जाने, यमुना पार करने और कंस से बचाने की प्रसिद्ध कथा।
श्रीकृष्ण के जन्म के बाद उनके पिता वासुदेव के सामने एक बड़ी चुनौती थी। मथुरा के कारागार में कंस का भय था और नवजात बालक की सुरक्षा आवश्यक थी।
भागवत पुराण की कथा के अनुसार, श्रीकृष्ण के प्राकट्य के बाद कारागार के द्वार खुल गए और पहरेदार सो गए। वासुदेव ने बालक को एक टोकरी में रखा और उन्हें लेकर गोकुल की ओर चल पड़े।
यमुना नदी पार करने की कथा
रात के समय वासुदेव यमुना नदी के किनारे पहुँचे। परंपरागत कथा में बताया जाता है कि उन्होंने बालक को सिर पर रखकर नदी पार की। भगवान की कृपा से उनका मार्ग सुगम हुआ। अनेक लोकप्रिय चित्रणों में शेषनाग को वर्षा से बालक की रक्षा करते हुए दिखाया जाता है।
गोकुल पहुँचकर वासुदेव ने बालक को माता यशोदा के पास सुला दिया और वहाँ से मथुरा लौट आए।
कथा का संदेश
वासुदेव का यह कार्य पिता के प्रेम, साहस और कर्तव्य का प्रतीक है। उन्होंने कठिन परिस्थितियों में भी बालक की सुरक्षा को सर्वोपरि रखा।
इससे जुड़ी कथाएँ पढ़ें: श्रीकृष्ण का जन्म, माता यशोदा और नंद बाबा तथा कंस की आकाशवाणी।
संदर्भ: श्रीमद्भागवत महापुराण, दशम स्कंध।
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