श्रीकृष्ण, अर्जुन और भीम के शंख

भगवद्गीता अध्याय 1 श्लोक 15 का संस्कृत पाठ, हिंदी अर्थ और सरल व्याख्या पढ़ें। जानें पांचजन्य, देवदत्त और पौण्ड्र शंख किसके थे।

Oct 16, 2026 - 22:59
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श्रीकृष्ण, अर्जुन और भीम के शंख

संस्कृत श्लोक

पाञ्चजन्यं हृषीकेशो देवदत्तं धनञ्जयः।

पौण्ड्रं दध्मौ महाशङ्खं भीमकर्मा वृकोदरः॥ १.१५॥

हिंदी अर्थ

श्रीकृष्ण ने पांचजन्य, अर्जुन ने देवदत्त और महान पराक्रमी भीम ने पौण्ड्र नामक विशाल शंख बजाया।

सरल व्याख्या

इस श्लोक में तीन महान व्यक्तियों के शंखों के नाम बताए गए हैं। श्रीकृष्ण का शंख पांचजन्य, अर्जुन का देवदत्त और भीम का पौण्ड्र कहलाता था।

महाभारत के युद्ध में शंखनाद सेना की तैयारी, साहस और उपस्थिति का संकेत था। इन नामों का उल्लेख कथा को अधिक जीवंत बनाता है और पाठक को प्रमुख पात्रों की पहचान याद रखने में सहायता करता है।

यह प्रसंग यह भी दिखाता है कि एक ही उद्देश्य के लिए काम करने वाले लोगों की अपनी अलग पहचान और भूमिका हो सकती है।

जीवन में सीख

हर व्यक्ति की अपनी प्रतिभा होती है। यदि हम अपनी क्षमता को पहचानकर सही दिशा में उसका उपयोग करें, तो व्यक्तिगत विकास के साथ-साथ समूह की सफलता में भी योगदान दे सकते हैं।

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आगे पढ़ें: भगवद्गीता अध्याय 1 श्लोक 16

निष्कर्ष

श्लोक 15 में पांचजन्य, देवदत्त और पौण्ड्र शंखों का वर्णन मिलता है। इसका व्यावहारिक संदेश है कि अपनी प्रतिभा को पहचानें और उसे जिम्मेदारी के साथ उपयोग करें।

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