भगवद गीता अध्याय 1 श्लोक 1: धृतराष्ट्र ने संजय से क्या पूछा? अर्थ, भावार्थ और जीवन की सीख

भगवद गीता अध्याय 1 श्लोक 1 का सरल हिंदी अर्थ, शब्दार्थ, भावार्थ और जीवन की महत्वपूर्ण सीख जानें। समझें कि धृतराष्ट्र ने संजय से कुरुक्षेत्र में कौरवों और पांडवों के बारे में क्या पूछा।

Sep 9, 2026 - 03:06
Oct 16, 2026 - 21:54
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भगवद गीता अध्याय 1 श्लोक 1: धृतराष्ट्र ने संजय से क्या पूछा? अर्थ, भावार्थ और जीवन की सीख
भगवद गीता अध्याय 1 श्लोक 1: धृतराष्ट्र ने संजय से क्या पूछा? अर्थ, भावार्थ और जीवन की सीख

भगवद गीता का आरंभ कुरुक्षेत्र के युद्धक्षेत्र से होता है। पहले अध्याय का नाम अर्जुन विषाद योग है। इस अध्याय में महाभारत के युद्ध से पहले की परिस्थितियों और अर्जुन के मन में उत्पन्न चिंता और मोह का वर्णन मिलता है।

भगवद गीता का पहला श्लोक हमें सीधे उस समय के युद्धक्षेत्र में ले जाता है, जहाँ धृतराष्ट्र अपने सारथी और विश्वसनीय सलाहकार संजय से युद्धभूमि की स्थिति के बारे में पूछते हैं।

भगवद गीता अध्याय 1 श्लोक 1

धृतराष्ट्र उवाच

धर्मक्षेत्रे कुरुक्षेत्रे समवेता युयुत्सवः।
मामकाः पाण्डवाश्चैव किमकुर्वत सञ्जय॥ १॥

सरल हिंदी अर्थ

धृतराष्ट्र ने कहा:

हे संजय! धर्मभूमि कुरुक्षेत्र में युद्ध करने की इच्छा से एकत्र हुए मेरे पुत्रों और पांडु के पुत्रों ने क्या किया?


श्लोक का शब्दार्थ

धर्मक्षेत्रे — धर्म की भूमि में
कुरुक्षेत्रे — कुरुक्षेत्र में
समवेताः — एकत्र हुए
युयुत्सवः — युद्ध करने की इच्छा रखने वाले
मामकाः — मेरे पुत्र
पाण्डवाः — पांडु के पुत्र
च एव — और
किम् — क्या
अकुर्वत — किया
सञ्जय — हे संजय


श्लोक का भावार्थ

इस श्लोक में धृतराष्ट्र संजय से कुरुक्षेत्र में एकत्र हुई दोनों सेनाओं के बारे में पूछते हैं।

धृतराष्ट्र जानते हैं कि उनके पुत्र कौरव और पांडव युद्ध के लिए आमने-सामने खड़े हैं। फिर भी उनके प्रश्न में एक महत्वपूर्ण बात दिखाई देती है—वे पांडवों और अपने पुत्रों को अलग-अलग देखते हैं।

वे कहते हैं:

“मामकाः” — मेरे पुत्र

और

“पाण्डवाः” — पांडु के पुत्र।

यह शब्द धृतराष्ट्र के मन में मौजूद मोह और पक्षपात को दर्शाते हैं।


कुरुक्षेत्र को धर्मक्षेत्र क्यों कहा गया?

श्लोक में कुरुक्षेत्र के लिए “धर्मक्षेत्र” शब्द का प्रयोग किया गया है।

कुरुक्षेत्र केवल युद्ध का स्थान नहीं था, बल्कि भारतीय परंपरा में इसे एक पवित्र भूमि माना जाता है। इसलिए धृतराष्ट्र के मन में यह चिंता भी हो सकती थी कि ऐसी धर्मभूमि का प्रभाव युद्ध में उपस्थित लोगों के निर्णयों पर क्या पड़ेगा।

यही प्रश्न भगवद गीता की पूरी कथा के लिए एक महत्वपूर्ण शुरुआत बनता है।


धृतराष्ट्र ने संजय से ही क्यों पूछा?

धृतराष्ट्र जन्म से नेत्रहीन थे और वे स्वयं युद्धभूमि को देख नहीं सकते थे।

संजय उन्हें युद्धभूमि में घट रही घटनाओं का वर्णन कर रहे थे। इसलिए धृतराष्ट्र ने संजय से पूछा कि कुरुक्षेत्र में एकत्र हुए कौरवों और पांडवों ने क्या किया।

संजय आगे युद्धभूमि की पूरी स्थिति का वर्णन करते हैं।


इस श्लोक में हमें क्या सीख मिलती है?

भगवद गीता का पहला श्लोक हमें बहुत गहरी सीख देता है।

1. मोह निर्णय को प्रभावित कर सकता है

जब व्यक्ति किसी व्यक्ति या वस्तु से अत्यधिक मोह कर लेता है, तो उसके निर्णय में निष्पक्षता कम हो सकती है।

2. पक्षपात समस्या को बढ़ा सकता है

धृतराष्ट्र का “मेरे पुत्र” और “पांडव” कहना उनके मानसिक पक्षपात को दिखाता है।

आज के जीवन में भी हमें परिवार, काम और समाज में निर्णय लेते समय निष्पक्ष रहने का प्रयास करना चाहिए।

3. सही प्रश्न सही समझ की शुरुआत है

गीता की शुरुआत ही एक प्रश्न से होती है।

यह हमें याद दिलाता है कि किसी भी समस्या को समझने के लिए सही प्रश्न पूछना बहुत महत्वपूर्ण है।


आज के जीवन में भगवद गीता 1.1 की प्रासंगिकता

आज हमारे जीवन में भी ऐसी परिस्थितियाँ आती हैं जहाँ हम किसी व्यक्ति, विचार या परिस्थिति के प्रति अपने मोह के कारण सही और गलत का निष्पक्ष निर्णय नहीं कर पाते।

यह श्लोक हमें अपने भीतर झाँकने और यह देखने की प्रेरणा देता है:

क्या मेरा निर्णय सत्य और धर्म पर आधारित है, या मेरे व्यक्तिगत मोह और पक्षपात पर?

यदि हम अपने निर्णयों में सत्य, विवेक और धर्म को प्राथमिकता देते हैं, तो कठिन परिस्थितियों में भी बेहतर मार्ग चुन सकते हैं।


Bhagavad Gita Chapter 1 Shloka 1 का सार

भगवद गीता का पहला श्लोक युद्ध की शुरुआत से पहले की मानसिक स्थिति को सामने रखता है। धृतराष्ट्र संजय से कुरुक्षेत्र में उपस्थित कौरवों और पांडवों के बारे में पूछते हैं।

यह श्लोक केवल युद्ध का वर्णन शुरू नहीं करता, बल्कि मोह, पक्षपात, धर्म और सही निर्णय जैसे महत्वपूर्ण विषयों की भूमिका भी तैयार करता है।

गीता के आगे के श्लोकों में हम देखेंगे कि युद्धभूमि में क्या हुआ और अर्जुन के मन में किस प्रकार का द्वंद्व उत्पन्न हुआ।


अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भगवद गीता का पहला श्लोक कौन सा है?

भगवद गीता का पहला श्लोक अध्याय 1, श्लोक 1 है। इसमें धृतराष्ट्र संजय से कुरुक्षेत्र में एकत्र कौरवों और पांडवों के बारे में पूछते हैं।

भगवद गीता के पहले श्लोक में किसने प्रश्न किया?

पहला श्लोक धृतराष्ट्र के प्रश्न से शुरू होता है। वे संजय से युद्धभूमि की स्थिति पूछते हैं।

भगवद गीता के पहले अध्याय का नाम क्या है?

पहले अध्याय का नाम अर्जुन विषाद योग है।

“धर्मक्षेत्रे कुरुक्षेत्रे” का क्या अर्थ है?

इसका सरल अर्थ है—धर्म की भूमि कुरुक्षेत्र में।

भगवद गीता का पहला श्लोक हमें क्या सिखाता है?

यह श्लोक हमें मोह और पक्षपात से ऊपर उठकर सत्य, धर्म और विवेक के आधार पर निर्णय लेने की प्रेरणा देता है।


आगे पढ़ें

भगवद गीता अध्याय 1 श्लोक 2:
दुर्योधन ने द्रोणाचार्य से क्या कहा? अगले श्लोक में जानिए।


श्रीमद्भगवद्गीता से जीवन में सकारात्मक परिवर्तन

भगवद गीता केवल एक प्राचीन ग्रंथ नहीं है, बल्कि जीवन की कठिन परिस्थितियों में सही सोच और सही कर्म का मार्ग दिखाने वाला ज्ञान का स्रोत है।

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