माँ कात्यायनी पूजा विधि, मंत्र, कथा और महत्व
नवरात्रि के छठे दिन माँ कात्यायनी की पूजा विधि, मंत्र, कथा, भोग और धार्मिक महत्व जानें। माता साहस, शक्ति और धर्म की रक्षा का प्रतीक हैं।
माँ कात्यायनी कौन हैं?
नवरात्रि का छठा दिन माँ कात्यायनी को समर्पित है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, महर्षि कात्यायन की तपस्या से प्रसन्न होकर देवी ने उनके घर पुत्री के रूप में जन्म लिया। इसी कारण वे कात्यायनी कहलाईं।
पूजा विधि
सुबह स्नान करके माता के सामने दीपक जलाएँ। लाल फूल, अक्षत, चंदन और फल अर्पित करें। मंत्र जपकर अपने परिवार की सुख-समृद्धि और जीवन में साहस की कामना करें।
माँ कात्यायनी का मंत्र
ॐ देवी कात्यायन्यै नमः।
माता की कथा
पौराणिक कथाओं के अनुसार, माँ कात्यायनी ने दुष्ट शक्तियों का नाश करके धर्म की रक्षा की। उनका स्वरूप अन्याय के विरुद्ध खड़े होने और सत्य का साथ देने की प्रेरणा देता है।
प्रिय भोग
माता को शहद अर्पित करने की परंपरा प्रचलित है। भक्त अपनी पारिवारिक परंपरा के अनुसार फल और मिठाइयाँ भी चढ़ाते हैं।
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निष्कर्ष: माँ कात्यायनी की आराधना शक्ति, साहस और धर्म के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देती है।
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